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करॉनाः हॉस्टल में अस्पताल, डरे भारतीय स्टूडेंट्स

पेइचिंग
चीन के हुबेई प्रांत में पढ़ाई कर रहे भारत और पाकिस्तान के छात्र अपनी सरकारों से उनकी सुरक्षित वापसी की अपील कर रहे हैं क्योंकि महामारी से निपटने के लिए चीन के अधिकारियों ने यूनिवर्सिटी परिसर में अस्थायी अस्पताल बनाने का फैसला किया है। बता दें कि भारत ने हुबेई प्रांत से अपने 647 नागरिकों को निकाला है लेकिन अभी भी वहां कई लोग मौजूद हैं।

अस्थायी अस्पताल के तौर पर जिम और हॉस्टल का प्रयोग किया जाएगा। चीन में वायरस का प्रकोप बढ़ रहा है। बुधवार को 254 लोगों की मौत के साथ ही मृतकों की संख्या 1,367 तक पहुंच गई है। एक दिन में मरने वालों की यह अब तक की सबसे ज्यादा संख्या है। इससे यह भी साबित होता है कि वायरस कमजोर नहीं पड़ रहा है। अधिकारियों ने बताया कि चीन में बुधवार तक 52,526 मामलों की पुष्टि हो चुकी है।

जिम और हॉस्टल को अस्थायी अस्पताल बनाने के आदेश के बाद हुबेई विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले तीन छात्रों ने भारत सरकार से अपील की है कि उन्हें यहां से निकालें। भारत पहले ही वुहान और हुबेई प्रांत के 647 नागरिकों को बाहर निकाल चुका है। 10 भारतीय विशेष विमान में नहीं सवार हो पाए थे क्योंकि उन्हें बुखार था। भारतीय अधिकारियों का कहना है कि इस क्षेत्र में अब भी 80 से 100 भारतीय नागरिक हैं।

वहीं 1,000 पाकिस्तानी छात्र हुबेई प्रांत में हैं। अपने नागरिकों को हुबेई प्रांत से बाहर नहीं निकालने को लेकर पाकिस्तान सरकार की हर ओर आलोचना हो रही है। पाकिस्तान के भी कई छात्रों ने शिकायत की है कि शयनकक्षों को अस्पतालों में बदला जा रहा है। हुबई यूनिवर्सिटी द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि जिम का इस्तेमाल वायरस से संक्रमित मरीजों को रखने के लिए करेगा। पहले इस सूची में यूनिवर्सिटी नहीं था, लेकिन अब आधिकारिक सूचना में इसे भी शामिल किया गया है।

Source: International

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