Chhattisgarh

शैलेष के बयान पर भाजपा प्रवक्ता का पलटवार स्वातंत्र्य संग्राम सेनानियों के मामले में कांग्रेसी तुष्टिकरण नीति पर चलते है – भाजपा

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता सच्चिदानंद उपासने ने स्वातंत्र्यवीर सावरकर के प्रति कांग्रेस नेताओं के नजरिये पर कड़ा एतराज जताया है। श्री उपासने ने कहा कि ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़कर वीर सावरकर के प्रति की जा रही टिप्पणियां देश के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले हुतात्माओं का घोर अपमान है।
भाजपा प्रवक्ता श्री उपासने ने कहा कि वीर सावरकर के हिन्दुत्वनिष्ठ जीवन-दर्शन के कारण कांग्रेस उनको अपमानित कर रही है। वीर सावरकर का भारतीय स्वातंत्र्य समर में उतना ही अमूल्य योगदान रहा है, जितना सभी हुतात्मा क्रांतिकारी बलिदानी जवानों का रहा है। कांग्रेस के लोग जिस तरह स्वातंत्र्य संग्राम सेनानियों के मामले में भी तुष्टिकरण के नजरिये से ग्रस्त नजर आ रहे हैं, वह कांग्रेस के शर्मनाक राजनीतिक चरित्र का प्रदर्शन है। भाजपा स्वतंत्रता संग्राम के सभी सेनानियों के प्रति हर मौके पर हृदय से कृतज्ञता व्यक्त करती रही है लेकिन कांग्रेस ने उन्हें भी राजनीतिक खांचों में कैद करने का घिनौना उपक्रम चला रखा है। नई दिल्ली में कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई द्वारा वीर सावरकर के प्रतिमा पर कालिख पोतने और जूते की माला पहनाने के कृत्य का विरोध करने की बजाय कांग्रेस ने उसे सही ठहराने और वीर सावरकर के प्रति भ्रामक तथ्यों के साथ अभद्र टिप्पणी करने का अपराध कर रही है, जिसे देश की मौजूदा और आने वाली पीढ़ियां कभी क्षमा नहीं करेगी।
श्री उपासने ने कहा कि कांग्रेस के लोगों का वीर सावरकर पर टिप्पणी करना उनकी अज्ञानता का परिचायक है। उन्हें अपनी इस अज्ञानता को देश पर थोपने का अधिकार कतई नहीं दिया जा सकता। उन्होंने कहा कि विनायक दामोदर सावरकर के नेतृत्व से अण्डमान की सेल्यूलर जेल भी भारतीय स्वातन्त्र्य का तीर्थ बन गई; जिन्होंने 1857 की क्रान्ति को ’भारतीय स्वातन्त्र्य के प्रथम समर’ का नाम दिया; जिन्होंने गोमान्तक जैसे ओजस्वी उपन्यासों से भारतीयों में स्वातन्त्र्य की अलख जगाई, ’भारतीय इतिहास के छः स्वर्णिम पृष्ठ’ के रूप में भारतवर्ष का इतिहास निर्भीकता से सामने रखा; स्वाधीनता के लिये दो जन्मों के कालेपानी की सजा भोगी; एक मृदुल हृदयी कवि, क्रान्तिकारी विचारक, राष्ट्रवादी लेखक के इस अपमान के लिए कांग्रेस को देश-प्रदेश से क्षमायाचना करनी चाहिए। कांग्रेस अपने छात्र संगठन एनएसयूआई को समझाए कि जब कार्यकर्त्ता उच्छृंखल हो जायें तो एक साथ संगठन नहीं सियारों का झुण्ड ही बनाते हैं।

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